1. अभिनंदन-पत्र कैसा होता है?
धर्मानुरागिनी प्यारी जनता !
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1. "अभी जो मैंने मान-पत्र सुना तथा स्वागताध्यक्ष का भाषण सुना तो दोनों के सुनने से मैं नहीं कह सकता कि प्रसन्नता मुझे नहीं हुई। मान-पत्र स्वाभाविक ही बढ़ा-चढ़ाकर लिखा जाता है। ऐसे मजमें में जो स्वागताध्यक्ष होते हैं, वे बड़े भाग्यवान होते हैं।"
प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंसी महाराज का यह प्रवचन नालन्दा जिलान्तर्गत भगवान महावीर और भगवान बुद्ध के विहार स्थल राजगीर में ५८वाँ अखिल भारतीय संतमत सत्संग का विशेषाधिवेशन दिनांक २८.१०.१९६६ ई० के अपराह्नकालीन सत्संग में हुआ था। जिसमें उन्होंने उपरोक्त बातें कही थी । महर्षि मेँहीँ सत्संग सुधा सागर के सभी प्रवचनों में कहाँ क्या है? किस प्रवचन में किस प्रश्न का उत्तर है? इसे संक्षिप्त रूप में जानने के लिए 👉यहाँ दवाएँ।
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महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर |
प्रभु प्रेमियों ! उपरोक्त प्रवचनांश 'महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर"' से ली गई है। अगर आप इस पुस्तक से महान संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के अन्य प्रवचनों के बारे में जानना चाहते हैं या इस पुस्तक के बारे में विशेष रूप से जानना चाहते हैं तो 👉 यहां दबाएं।
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S246, 1. अभिनंदन-पत्र कैसा होता है? How to write a congratulatory letter in Hindi?
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
5/26/2024
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