G06, (छ) ध्यान योगाभ्यास की महिमा व चमत्कारिक बातें -महर्षि मेंहीं - SatsangdhyanGeeta

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G06, (छ) ध्यान योगाभ्यास की महिमा व चमत्कारिक बातें -महर्षि मेंहीं

श्रीगीता-योग-प्रकाश 06/ (छ)    

प्रभु प्रेमियों ! वराह पुराण में श्रीमद्भागवतगीता की महिमा गाते में लिखा गया है- "यः श्रृणोति च गीतार्थ कीर्तयेच्च स्वयं पुमान्- श्रावयेच्च परार्थ वै स प्रयाति परं पदम् ।"  अर्थात् जो मनुष्य स्वयं गीता का अर्थ सुनता है , गाता है और परोपकार हेतु सुनाता है वह परम पद को प्राप्त होता है।  "नोपसर्पन्ति तत्रैव यत्र गीतार्चनं गृहे- तापत्रयोद्भवाः पीडा नैव व्याधिभयं तथा।"   अर्थात् जिस घर में गीता का पूजन होता है वहां ( आध्यात्मिक , आधिदैविक और आधिभौतिक ) तीन ताप से उत्पन्न होने वाली पीड़ा तथा व्याधियों का भय नहीं आता।

इस पोस्ट को पढ़ने से आप निम्नांकित सवालों के जवाबों में से कुछ-न-कुछ का समाधान अवश्य पाएंगे। जैसे-  ध्यान और समाधि, गीता में ध्यान योग, जीवन में ध्यान का महत्व, ध्यान लगाना,ध्यान मंत्र साधना,ध्यान धारणा और समाधि, स्थूल ध्यान, ध्यान करने का सही तरीका, ध्यान करना, मैडिटेशन की विधि, भृकुटी ध्यान के फायदे, सचेतन ध्यान,ध्यान के खतरे,ध्यान के लक्षण,ध्यान साधना के अनुभव,ध्यान के लाभ,ध्यान में शरीर का हिलना,ध्यान में प्रकाश दिखना,ध्यान के प्रकार,ध्यान से चमत्कार,ध्यान कैसे करें,ध्यान की वैज्ञानिक विधि,गीता में ध्यान,मेडिटेशन,, ध्यान योग इन हिंदी, ध्यान कैसे करें, ध्यान के लिए योग ऐसे करें ध्यान योग, दुर्लभ क्रिया योग और समाधि की सातों स्थिति, ध्यान योग क्या है, ध्यान की परिभाषा, ध्यान के फायदे, ध्यान योग साधना, ध्यान की व्याख्या,योग परिभाषा, ध्यान के प्रकार आदि बातें।


पूज्य गुरुदेव
पूज्य गुरुदेव

ध्यान योगाभ्यास की महिमा व चमत्कारिक बातें 

संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज  के भारती (हिंदी) पुस्तक "श्री गीता योग प्रकाश" के अध्याय G06, (छ) में बताया गया है कि ध्यान योगाभ्यास की महिमा व चमत्कारिक बातों के संबंध में। ध्यान योग की महिमा अपार है, उसका वर्णन करने में काफी समय लग सकता है, यहां संक्षेप में बताया गया है । जो अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब तक हम लोग ध्यान के विषय पर चर्चा कर रहे हैं। भगवान श्री कृष्ण द्वारा कथित ज्ञान को सद्गुरु महर्षि मेंही के शब्दों में समझते हुए हम लोगों ने जाना कि श्रीमद्भागवत गीता एवंं अन्य संतो के साथ-साथ प्राचीन ऋषियों के अनुसार ध्यान योग की असली समाधि और कर्म समाधि में क्या अंतर है?  अब जानेंगेे कि ध्यान योग की महिमा और चमत्कार क्या है? तो आइए आगेेे का लेख पढ़ें-

इस लेख के पहले भाग को पढ़ने के लिए  यहां दबाएं


गीता अध्याय 6/ लेख चित्र 24
गीता अध्याय 6/ लेख चित्र 24

     गुरु महाराज के पास एक बार एक योगी आए और उन्होंने कहा चमत्कार बिना, नमस्कार नहीं । गुरु महाराज बहुत ही नम्र शब्दों में कहा कि "सदाचार का पालन हो, यही चमत्कार है।"

गीता अध्याय 6/ लेख चित्र 25
गीता अध्याय 6/ लेख चित्र 25
 
  भगवान श्री कृष्ण द्वारा बताए गए इस (बिंदु ध्यान या नासाग्र में देखने का कला) योगाभ्यास का स्वल्प अभ्यास भी व्यक्ति को मनुष्य जन्म ही दिलाता है, दूसरे योनियों में यानी मनुष्यों योनि से भिन्न पशु बगैरह की योनि में नहीं जाने देता। ध्यान योग के चमत्कार तो अद्भुत-अद्भुत हैं। योगाभ्यास के प्रभाव से कुछ भी किया जा सकता है, इसमें अष्ट सिद्धि प्रसिद्ध है। इसके बारे में बताया जा चुका है।

गीता अध्याय 6/ लेख चित्र 26
गीता अध्याय 6/ लेख चित्र 26
   
  योगाभ्यास में पारंगत होनेवाले साधकों को चाहिए कि वे योग की सिद्धियां, चमत्कार इत्यादि के चक्कर में ना पड़ें, क्योंकि यह ध्यान साधना से नीचे गिराती जाती हैं और साधक ध्यानाभ्यास के अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पाता हैं।

गीता अध्याय 6/ लेख चित्र समाप्त
गीता अध्याय 6/ लेख चित्र समाप्त

इस अध्याय के बाद का सातवां अध्याय पढ़ने के लिए     यहां दबाएं

    प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के भारती पुस्तक "श्रीगीता योग प्रकाश" के इस लेख का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  ध्यान योगाभ्यास की महिमा व चमत्कारिक बातों के संबंध में।  । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। निम्नलिखित वीडियो में उपर्युक्त लेख का पाठ किया गया है।
 


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G02, (ख) What is the numerical sum of Shrimad Bhagwat Geeta - सद्गुरु महर्षि मेंही
G06, (छ) ध्यान योगाभ्यास की महिमा व चमत्कारिक बातें -महर्षि मेंहीं G06, (छ) ध्यान योगाभ्यास की महिमा व चमत्कारिक बातें  -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 7/30/2018 Rating: 5

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