G11, ईश्वर का विराट रूप और परमात्म दर्शन -महर्षि मेंहीं - SatsangdhyanGeeta

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G11, ईश्वर का विराट रूप और परमात्म दर्शन -महर्षि मेंहीं

     ईश्वर का विराट रूप और परमात्म दर्शन

      प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "श्री गीता योग प्रकाश" के अध्याय 11वां,  में बताया गया है कि   विराट रूप का दर्शन ईश्वर के आत्मस्वरुप का दर्शन है या नहीं? क्या विराट रूप के दर्शन परमात्म दर्शन है? क्या विराट रूप के दर्शन से, 'परमात्म दर्शन से जो-जो सिद्धियां प्राप्त होती है, वे सारी सिद्धियां और फल अर्जुन को तथा संजय को प्राप्त हुआ था? परमात्म दर्शन और विराट रूप दर्शन का सही स्वरूप में यथार्थ रहस्य क्या है? इस बात को सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज बता रहे हैं। 

भगवान का विराट रूप
भगवान का विराट रूप

प्रभु प्रेमियों हम लोग श्रीमद्भागवत गीता संबंध एवं विचारों को सही रुप में समझने का प्रयास करते हुए आज 11 वा अध्याय में पहुंच गए हैं। इस अध्याय में गुरु गुरु महाराज भगवान के विराट रूप दर्शन को परमात्म -दर्शन नहीं मानते हैं। उनका क्या विचार है, निम्नलिखित लेख में पढ़ें-
लेख चित्र एक
लेख चित्र एक
 भगवान के विराट रूप का दर्शन करके ना तो अर्जुन को अलौकिक शक्तियां, सिद्धियां प्राप्त हुई और ना संजय को ही। परमात्मा का दर्शन करके व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त हो जाता है जो इन लोगों को प्राप्त नहीं हुआ। पढ़िए महाभारत के स्वर्गारोहण पर्व । स्वर्ग जाते समय Arjun रास्ते में ही गिर जाते हैं।
लेख चित्र दो
लेख चित्र दो
       ईश्वर के आत्म स्वरुप का दर्शन करने के लिए संतमत की जो साधना पद्धति है उन साधनाओं को किए बिना, कोई ईश्वर के आत्म स्वरुप का दर्शन नहीं कर सकता।
लेख चित्र समाप्त
लेख चित्र समाप्त
     संतमत के साधना का क्या स्वरूप है, यह एक लंबा विषय है। उसका चित्र नीचे दिया जा रहा है । इस चित्र को समझने के लिए एक पुस्तक लिखी जा चुकी है ।जिसका नाम "पिंड माही ब्रह्माण्ड" है। यह पुस्तक महर्षि मेंही आश्रम, कुप्पाघाट, भागलपुर (बिहार) से प्राप्त किया जा सकता है। जो संत नगर से प्रकाशित होता है।

संतमत की साधना संबंधी चित्र
संतमत की साधना संबंधी चित्र
     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के भारती पुस्तक "श्रीगीता योग प्रकाश" के इस लेख का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  विराट रूप का दर्शन ईश्वर के आत्मस्वरुप का दर्शन नहीं  है । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।

G11, ईश्वर का विराट रूप और परमात्म दर्शन -महर्षि मेंहीं G11, ईश्वर का विराट रूप और परमात्म दर्शन  -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 8/01/2018 Rating: 5

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