G12, (ख) ईश्वर भक्ति में साधना का क्रमशः विकास -महर्षि मेंहीं - SatsangdhyanGeeta

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G12, (ख) ईश्वर भक्ति में साधना का क्रमशः विकास -महर्षि मेंहीं

 श्री गीता योग प्रकाश / 12 ख  

      प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "श्री गीता योग प्रकाश" के अध्याय 12 (ख) के अनुसार   ईश्वर भक्ति में साधना का क्रमशः विकास पर चर्चा किया गया है। तो आइए !  गुरु महाराज लेख का पाठ करके ही जाने कि गुरु महाराज इस विषय पर क्या कहते हैं- इस पोस्ट के पहला भाग पढ़ने के लिए       

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पूज्य गुरुदेव
पुज्य गुरुदेव



गीता अध्याय 12,लेख चित्र 5
गीता अध्याय 12,लेख चित्र 5

ईश्वर प्राप्ति में साधना का क्रमश: विकास

     इस अध्याय के इस पोस्ट में दिए गए लेख चित्रों को पढ़ने के बाद गुरु महाराज स्पष्ट कर देते हैं कि दोनों ही तरह के साधकों को बहुत कष्ट उठाना पड़ता है । चूंकि ईश्वर भक्ति का लक्ष्य है, परम प्रभु परमात्मा की प्राप्ति और दैहिक, दैविक, भौतिक त्रयतापों  से मुक्ति है ।अत: प्रभु प्राप्ति के रास्ते में व्यक्ति को क्रम-क्रम से  कैसे चलना है?  वह साधना का क्रम क्या है? इस पर इस लेख में खुलासा किया गया है।

गीता अध्याय 12,लेख चित्र 6
गीता अध्याय 12,लेख चित्र 6

    भक्ति का आरंभ शगुन उपासना से ही होती है। लेकिन भक्ति की पूर्णता ईश्वर दर्शन से होती है। ईश्वर का दर्शन निर्गुण उपासना की सिद्धि पर है। जब कोई भक्त मानस जप, मानस ध्यान, दृष्टि साधन और नादानुसंधान की पूर्णता कर लेता है। तब उसे ईश्वर का दर्शन प्राप्त हो जाता है। इस बीच में वह साधक कहलाता है।

गीता अध्याय 12,लेख चित्र 7
गीता अध्याय 12,लेख चित्र 7

     साधक भजन साधना में उत्तरोत्तर तरक्की करते जाता है। तो उसका हौसला और उत्साह बढ़ता जाता है । जिस कारण से वह शीघ्र ही ईश्वर प्राप्ति करता है। लेकिन कुछ साधक साधना को परखने के चक्कर में, रिद्धि सिद्धि और कई तरह के चमत्कार के चक्कर में फंसकर उससे नीचे गिर जाता है । ऐसा करना अपने लक्ष्य से भटक जाना है।

गीता अध्याय 12,लेख चित्र 8
गीता अध्याय 12,लेख चित्र 8

      प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के भारती पुस्तक "श्रीगीता योग प्रकाश" के इस लेख का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि ईश्वर भक्ति में साधना का क्रमशः विकास पर किया गया चर्चा । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस लेख के शेष भाग को पढ़ने के लिए     
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G12, (ख) ईश्वर भक्ति में साधना का क्रमशः विकास -महर्षि मेंहीं G12, (ख) ईश्वर भक्ति में साधना का क्रमशः विकास  -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 8/03/2018 Rating: 5

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प्रभु-प्रेमी पाठको ! ईश्वर प्राप्ति के संबंध में ही चर्चा करते हुए कुछ टिप्पणी भेजें। श्रीमद्भगवद्गीता पर बहुत सारी भ्रांतियां हैं ।उन सभी पर चर्चा किया जा सकता है।
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