G12, (ग) गीता के अनुसार ध्यानयोग ही राजविद्याराजगुह्ययोग है -महर्षि मेंहीं - SatsangdhyanGeeta

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G12, (ग) गीता के अनुसार ध्यानयोग ही राजविद्याराजगुह्ययोग है -महर्षि मेंहीं

 श्री गीता योग प्रकाश / 12 ग

        प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "श्री गीता योग प्रकाश" के अध्याय 12 के अनुसार ध्यान योग ही राजविद्याराजगुह्ययोग है। तो आइए गुरु महाराज के लेख का पाठ करें- इस लेख के दूसरे भाग को पढ़ने के लिए       यहां दबाएं

व्हीलचेयर पर गुरुदेव
व्हीलचेयर पर गुरुदेव


गीता अध्याय 12 लेट चित्र 9
गीता अध्याय 12 लेख चित्र 9

                   ध्यान योग करें या प्राणायाम

      गुरु महाराज के लेख के इस भाग को पढ़ने के के बाद स्पष्ट हो जाता है कि श्रीमद्भगवद्गीता ध्यान योग करने को ही विशेष रूप से प्रेरित करती है और गीता की रुचि ध्यान योग कराने के लिए ही है।  लेख में सारी बातें है हैं फिर भी मैं कुछ इसलिए लिख रहा हूं कि ब्लॉक में ऐसा नियम है कुछ लिखा जाना चाहिए। नहीं  तो वह सर्च में नहीं आता है। हम चाहते हैं किकि गु महाराज का लेख हर तरह से लोगों के सामने उपस्थित हो और लोग उसे लाभ उठावें। इसलिए मैं गुरु महाराज के बातों को ही कुछ लिख करके आप लोगों को बताता हूं ।     


गीता अध्याय 12 लेख चित्र 10
गीता अध्याय 12 लेख चित्र 10

     गुरु महाराज का ज्ञान हर दृष्टिकोण से सर्वश्रेष्ठ है ।इसलिए हम लोगों को ज्यादा से ज्यादा गुरु महाराज के वचन पढ़ने चाहिए, सुनने चाहिए, स्मरण करना चाहिए ।इससे हर तरह का लाभ हम लोगों को अवश्य ही होगा।

गीता अध्याय 10 लेख चित्र 11
गीता अध्याय 12 लेख चित्र 11
  
     गुरु महाराज कुछ भी कहने के पहले, उसे अपने अनुभव ज्ञान के द्वारा, धर्म शास्त्रों के द्वारा एवं अपने गुरुजनों के कथनानुसार विचार लेते के बाद ही कुछ कहते हैं। इसलिए उनकी बात हर दृष्टिकोण से प्रमाणित होता है। इसलिए हम सबों को अवश्य ही गुरु महाराज के हर लेख को पढ़ना चाहिए। हर प्रवचन को सुनना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा गुरु महाराज के ही आस-पास को देखें, सुनें और बोले । तो गुरु भक्ति और मानस ध्यान जल्दी होगा। जय गुरु महाराज।
गीता अध्याय 12 लेख चित्र समाप्त
गीता अध्याय 12 लेख चित्र समाप्त
      प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के भारती पुस्तक "श्रीगीता योग प्रकाश" के इस लेख का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  ध्यान योग करें या प्राणायाम  । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस लेख के पहले भाग को पढ़ने के लिए        


G12, (ग) गीता के अनुसार ध्यानयोग ही राजविद्याराजगुह्ययोग है -महर्षि मेंहीं G12, (ग) गीता के अनुसार ध्यानयोग ही राजविद्याराजगुह्ययोग है -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 8/04/2018 Rating: 5

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