G04, (ख) ज्ञान, कर्म, सन्यास, योग और गीता ज्ञान का इतिहास --महर्षि मेंहीं - SatsangdhyanGeeta

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G04, (ख) ज्ञान, कर्म, सन्यास, योग और गीता ज्ञान का इतिहास --महर्षि मेंहीं

श्रीगीता-योग-प्रकाश / 04 (ख)

प्रभु प्रेमियों !  श्रीमद्भागवत गीता की महिमा में बताया गया है कि "जो मनुष्य शुद्धचित्त होकर प्रेमपूर्वक इस पवित्र गीताशास्त्रका पाठ करता है, वह भय और शोक आदिसे रहित होकर विष्णुधामको प्राप्त कर लेता है॥"  "जो मनुष्य शुद्धचित्त होकर प्रेमपूर्वक इस पवित्र गीताशास्त्रका पाठ करता है, वह भय और शोक आदिसे रहित होकर विष्णुधामको प्राप्त कर लेता है॥१॥" "जो मनुष्य सदा गीताका पाठ करनेवाला है तथा प्राणायाममें तत्पर रहता है, उसके इस जन्म और पूर्वजन्ममें किये हुए समस्त पाप नि:सन्देह नष्ट हो जाते हैं॥२॥"  इस तरह की बहुत सारी बातें गीता महिमा के अनुकूल है। परंतु इसकी वास्तविक जानकारी किसी योगी महापुरुष की वाणी से ही निश्चित होती है। 

सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज द्वारा रचित "श्री गीता योग प्रकाश" के अध्याय 4 के दूसरे भाग में हम लोग जानेंगे-कर्म क्या है? यह हमारे भाग्य पर कैसे काम करता है?  तीन प्रकार के कर्म,कर्म का उद्देश्य, कर्म का सिद्धांत, कर्म का सिद्धांत किससे संबंधित है?मनुष्य का कर्म क्या है? गीता उपदेश, कर्मों का फल,अच्छे कर्म क्या है? प्रारब्ध क्या है? भगवत गीता के अनुसार योग क्या है? कर्म का महत्व, निष्काम कर्मयोग क्या है? इत्यादि बातें।


पूज्यपाद गुरुदेव
पूज्यपाद गुरुदेव

ज्ञान, कर्म, सन्यास, योग और गीता ज्ञान का इतिहास

सदगुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज ने बताया है । कर्म क्या है? कर्म, सन्यास, योग और गीता ज्ञान का इतिहास  क्या है? धर्म कैसे करना चाहिए? संसार में रहते हुए गीता ज्ञान का अभ्यास कैसे करें?  इस बात पर भी जोर दिया गया है कि कर्म करें और उसका फल से मुक्त हो जाए। यह कैसे होगा? बातों को अच्छी तरह समझने के लिए निम्नांकित लेख पढ़ेंं-


 इस लेख के पहले भाग को पढ़ने के लिए   यहां दबाएं
गीता लेख चित्र 6
गीता लेख चित्र 6

गीता लेख चित्र 7
गीता लेख चित्र 7

गीता लेख चित्र 8
गीता लेख चित्र 8

गीता लेख चित्र 9
गीता लेख चित्र 9

गीता लेख चित्र 10
गीता लेख चित्र 10

इस लेख के शेष भाग को पढ़ने के लिए    यहां दबाएं


     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के भारती पुस्तक "श्रीगीता योग प्रकाश" के इस लेख का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  गीता में वर्णित राजयोग अत्यंत पुराना है। इस योग के इतिहास एवं सही स्वरूप का वर्णन इस अध्याय में सदगुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज ने बताया है । कर्म क्या है  । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। 


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G02, (ख) What is the numerical sum of Shrimad Bhagwat Geeta - सद्गुरु महर्षि मेंही


G04, (ख) ज्ञान, कर्म, सन्यास, योग और गीता ज्ञान का इतिहास --महर्षि मेंहीं G04, (ख) ज्ञान, कर्म, सन्यास, योग और गीता ज्ञान का इतिहास --महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 6/16/2020 Rating: 5

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